Friday, June 12, 2020

19 camel story

*19 ऊंट की कहानी*
मजाक में मत लेना जी...

🐪🐪🐪🐪🐪🐪🐪🐪
 
एक गाँव में एक व्यक्ति के पास 19 ऊंट थे। एक दिन उस व्यक्ति की मृत्यु हो गयी। मृत्यु के पश्चात वसीयत पढ़ी गयी। जिसमें लिखा था की :

मेरे 19 ऊंटों में से आधे मेरे बेटे को,19 ऊंटों में से एक चौथाई मेरी बेटी को, और 19 ऊंटों में से पांचवाँ हिस्सा मेरे नौकर को दे दिए जाएँ।

सब लोग चक्कर में पड़ गए कि ये बँटवारा कैसे हो ?

19 ऊंटों का आधा अर्थात एक ऊँट काटना पड़ेगा, फिर तो ऊँट ही मर जायेगा। चलो एक को काट दिया तो बचे 18 उनका एक चौथाई साढ़े चार- साढ़े चार. फिर?
सब बड़ी उलझन में थे। फिर पड़ोस के गांव से एक बुद्धिमान व्यक्ति को बुलाया गया।

वह बुद्धिमान व्यक्ति अपने ऊँट पर चढ़ कर आया, समस्या सुनी, थोडा दिमाग लगाया, फिर बोला इन 19 ऊंटों में मेरा भी ऊँट मिलाकर बाँट दो।

सबने सोचा कि एक तो मरने वाला पागल था, जो ऐसी वसीयत कर के चला गया, और अब ये दूसरा पागल आ गया जो बोलता है कि उनमें मेरा भी ऊँट मिलाकर बाँट दो। फिर भी सब ने सोचा बात मान लेने में क्या हर्ज है।

19+1=20 हुए।

20 का आधा 10, बेटे को दे दिए।

20 का चौथाई 5, बेटी को दे दिए।

20 का पांचवाँ हिस्सा 4, नौकर को दे दिए।

10+5+4=19 

बच गया एक ऊँट, जो बुद्धिमान व्यक्ति का था...

वो उसे लेकर अपने गॉंव लौट गया।

इस तरह 1 उंट मिलाने से, बाकी 19 उंटो का बंटवारा सुख, शांति, संतोष व आनंद से हो गया।

हम सब के जीवन में भी 19 ऊंट होते हैं।

5 ज्ञानेंद्रियाँ
(आँख, नाक, जीभ, कान, त्वचा)

5 कर्मेन्द्रियाँ
(हाथ, पैर, जीभ, मूत्र द्वार, मलद्वार)

5 प्राण
(प्राण, अपान, समान, व्यान, उदान)

और

4 अंतःकरण
(मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार)

कुल 19 ऊँट होते हैं। 

सारा जीवन मनुष्य इन्हीं 19 ऊँटो के बँटवारे में उलझा रहता है।

और जब तक उसमें *मित्र* रूपी ऊँट नहीं मिलाया जाता यानी के दोस्तों के साथ.... 
सगे-संबंधियों के साथ जीवन नहीं जिया जाता, तब तक सुख, शांति, संतोष व आनंद की प्राप्ति नहीं हो सकती।

यह है 19 ऊंट की कहानी...
सभी मित्रों ओर सगे-संबंधियों को समर्पित...

😌🙏

Sunday, March 8, 2020

Happy Womens Day - kidding

भैया मुझसे उपर नहीं चढ़ा जाएगा बोलकर ट्रेन में लोअर बर्थ हथिया लेने वाली महिलाओं को भी 
*Happy Womens Day* 
😂😂🏃🏃🏃

भैया मुझे बस में उल्टी आती है बोल के बहाने से विंडो सीट हथिया लेने वाली महिलाओं को भी 
*Happy Womens Day*
😂😂🏃🏃

 घर में , अपनी माँ के आने पर खुश और सास के आते ही बीमारी का बहाना बना लेने वाली महिलाओ को भी 
*महिला दिवस की बधाई !!!*
😂😃😝

 पड़ोसन को देखते ही , ठीक वैसा नेकलेस और साड़ी दिलवाने के लिए पति का खून पी जाने वाली महिलाओ को भी 
*महिला दिवस की बधाई !!!*
😂😃😝

 विदाई में साड़ी मिलने पर " अरे इसकी क्या जरूरत थी " और घर आकर " ऐसी साड़ी तो हमारी नौकरानी " भी ना पहने.... बोलने वाली महिलाओं को भी...
*बहुत बहुत शुभकामनायें!*
😂

तीन घण्टे लगातार पड़ोस की बहू को कोसने के बाद.... ये बोलना कि "भाड़ में जाये हमे क्या करना" वाली महिलाओं को भी 
*बहुत बहुत शुभकामनायें!*
😂

 ब्रेक दबाने के बजाए जमीन पर पैर रख के, स्कुटी रोकने की कोशिश करने वाली महिलाओं को 

*Happy Womens Day*
😂

अपनी स्कूटी का राईट इंडिकेटर देकर लेफ्ट में मुड़ने वाली सभी महिलायों को भी 
*Happy Womens Day*
😂😂🤘🏃🏃🏃

 

एक गोलगप्पा छोटा निकल जाने पर बैंडिट क्वीन की तरह गोलगप्पे वाले को धमकाने वाली लड़कियों को , 
*महिला दिवस की हार्दिक बधाई* !!!
😂😂

उन लड़कियों को भी *महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं* जिनके पेट में कोई बात नही पचती।
😂😃😝

 गोलगप्पे खाने के बाद हक से अंत में एक मसाला गोलगप्पा खाने वाली फिर यह कहकर कि भैया टेस्ट नहीं आया दूसरा दो,  महिलाओं को भी *महिला दिवस की शुभकामनाएं*

आज *अंतर्राष्ट्रीय पुरुष मौन दिवस* हैं !!
😷चुप रहें खुश रहे 😍

Sunday, February 9, 2020

if alive

तू जिन्दा है तो जिन्दगी की जीत पर यकीन कर,
अगर है स्वर्ग कहीं तो उतार ला जमीन पर।

Thursday, January 16, 2020

खिचड़ी का अविष्कार

एक मित्र के सौजन्य से :-
#खिचड़ी का अविष्कार।
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कई वर्षों पहले एक बार,
दिन का नाम था रविवार।

पति-पत्नी की एक जोड़ी थी,
नोंकझोंक जिनमें थोड़ी थी।

अधिक था उनमें प्यार,
मीठी बातों का अम्बार।

सुबह पतिदेव ने ली अंगड़ाई,
पत्नी ने बढ़िया चाय पिलाई।

फिर नहाने को पानी किया गर्म,
निभाया अच्छी पत्नी का धर्म।

पति जब नहाकर निकल आए,
पत्नी ने बढ़िया पकौड़े खिलाए।

फिर पतिदेव ने समाचार-पत्र पकड़ा,
दोनों हाथों में उसे कसकर जकड़ा।

अगले तीन घंटे तक न खिसके,
रहे वो समाचार-पत्र से चिपके।

पत्नी निपटाती रही घर के काम,
मिला न एक पल भी आराम।

एक पल को जो कुर्सी पर टिकी,
पति ने तुरंत फरमाइश पटकी।

बोले अब नींद आ रही है ढेर सारी,
प्रियतमा बना दो पूड़ी और तरकारी।

पत्नी बोली मैं हूँ आपकी आज्ञाकारी,
लेकिन फ्रिज में नहीं है तरकारी।

पति बोले दोपहर तक कोहरा छाया है,
सूरज को भी बादलों ने छिपाया है।

ऐसे में तरकारी लेने तो न जाऊँगा,
छोड़ो पूड़ी, दाल-चावल ही खाऊँगा।

पत्नी बोली थोड़ी देर देखिए टीवी,
अभी खाना बनाकर लाती बीवी।

पति तुरंत ही गए कमरे के अंदर,
पत्नी ने रसोई में खोले कनस्तर।

दाल-चावल उसमें रखे थे पर्याप्त,
पर सिलेंडर होने वाला था समाप्त।

बन सकते थे चावल या फिर दाल,
क्या बनाएँ क्या न का था सवाल।

कोहरा, बादल और था थरथर जाड़ा,
सूरज निकले गुजर चुका था पखवाड़ा।

कैसे कहती पत्नी कि सिलेंडर लाना है
वरना दाल-चावल को भूल जाना है।

इतनी ठंड में पति को कैसे भेजूँ बाजार,
काँप-काँप उनका हो जाएगा बँटाधार।

इस असमंजस से पाने के लिए मुक्ति,
धर्मपत्नी ने लगायी एक सुंदर युक्ति।

कच्ची दाल में कच्चे चावल मिलाए,
धोकर उसने तुरंत कुकर में चढ़ाए।

कुछ देर में एक लम्बी सी आई सीटी,
पति के पेट में चूहे करने लगे पीटी।

पत्नी ने मेज पर खिचड़ी लगायी,
साथ में अचार और दही भी लायी।

नया व्यंजन देखकर दिमाग ठनका,
और पति के मुख से स्वर खनका।

बोले न तो है चावल न ही है दाल,
दोनों को मिलाजुला ये क्या है बवाल।

पत्नी बोली सिलेंडर हो गया खाली,
इसलिए मैंने चावल-दाल मिला डाली।

एक बार ही कुकर था चढ़ सकता,
दाल-चावल में से कोई एक पकता।

इतनी ठंड में आप जो बाहर जाते,
अगले दो घण्टे तक कँपकँपाते।

इसलिए मैंने इन दोनों को मिलाया,
आपके लिए ये नया व्यंजन बनाया।

खाने से पहले धारणा मत बनाइए,
तनिक एक चम्मच तो चबाइए।

पेट में चूहे घमासान मचा रहे थे,
चावल देख पति ललचा रहे थे।

नुक्ताचीनी और नखरे छोड़कर,
खाया एक कौर चम्मच पकड़कर।

नये व्यंजन का नया स्वाद आया,
पत्नी का नवाचार बहुत भाया।

बोले अद्भुत संगम तुमने बनाया,
और मुझे ठण्ड से भी है बचाया।

तृप्त हूँ मैं ये नया व्यंजन खाकर,
और धन्य हूँ तुम-सी पत्नी पाकर।

पर एक बात तो बताओ प्रियतमा,
क्या नाम है इसका, क्या दूँ उपमा।

पत्नी बोली पहली बार इसे बनाया,
नाम इसका अभी कहाँ है रख पाया।

खिंच रही थी गैस दुविधा थी बड़ी,
इसलिए इसको बुलाएँगे खिचड़ी।

मित्रों इनके सामने जब समस्या हुई खड़ी,
न तो पति चिल्लाया न ही पत्नी लड़ी।

आपके समक्ष भी आए जब ऐसी घड़ी,
प्रेम से पकाइएगा कोई नयी खिचड़ी।

तो इस पूरी घटना का जो निकला सार,
उसे हम कह सकते हैं कुछ इस प्रकार।

कि पति-पत्नी में जब हो असीम प्यार,
तो हो जाता है खिचड़ी का अविष्कार

Thursday, January 2, 2020

what should I change in this new year

एक तेरा अभाव बदल दूँ
या मेरे मन के भाव बदल दूँ
तू हीं बता ऐ जिंदगी मुझे
इस नए साल में
क्या बदल दूँ।
जीने का अंदाज़ बदल दूँ 
लिखने के अल्फ़ाज़ बदल दूँ 
तू हीं बता ऐ जिंदगी मुझे
इस नए साल में
क्या बदल दूँ।
मेरे मन की पीर बदल दूँ 
या आँखों का नीर बदल दूँ 
तू हीं बता ऐ जिंदगी मुझे
इस नए साल में
क्या बदल दूँ।
किया बहुँत वो प्यार बदल दूँ
दिल के सारे घाव बदल दूँ
तू हीं बता ऐ जिंदगी मुझे
इस नए साल में
क्या बदल दूँ।
मन का वो मेरा मीत बदल दूँ
जीवन का संगीत बदल दूँ
तू हीं बता ऐ जिंदगी मुझे
इस नए साल में
क्या बदल दूँ।
दर्द बदल दूँ दाग बदल दूँ
जंग लगा वो साज बदल दूँ
तू हीं बता ऐ जिंदगी मुझे
इस नए साल में
क्या बदल दूँ।

Sunday, December 29, 2019

Crazy house wives

"ये गृहणियाँ भी थोड़ी पागल सी होती हैं"
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सलीके से आकार दे कर
रोटियों को गोल बनाती हैं
अौर अपने शरीर को ही
आकार देना भूल जाती हैं
ये गृहणियाँ भी
थोड़ी पागल सी होती हैं।।

ढेरों वक्त़ लगा कर घर का
हर कोना कोना चमकाती हैं
उलझी बिखरी ज़ुल्फ़ों को
ज़रा सा वक्त़ नही दे पाती हैं
ये गृहणियाँ भी
थोड़ी पागल सी होती हैं।।

किसी के बीमार होते ही
सारा घर सिर पर उठाती हैं
कर अनदेखा अपने दर्द
सब तकलीफ़ें टाल जाती हैं
ये गृहणियाँ भी
थोड़ी पागल सी होती हैं ।।

खून पसीना एक कर
सबके सपनों को सजाती हैं
अपनी अधूरी ख्वाहिशें सभी
दिल में दफ़न कर जाती हैं
ये गृहणियाँ भी
थोड़ी पागल सी होती हैं।।

सबकी बलाएँ लेती हैं
सबकी नज़र उतारती हैं
ज़रा सी ऊँच नीच हो तो
नज़रों से उतर ये जाती हैं
ये गृहणियाँ भी
थोड़ी पागल सी होती हैं।।

एक बंधन में बँध कर
कई रिश्तें साथ ले चलती हैं
कितनी भी आए मुश्किलें
प्यार से सबको रखती हैं
ये गृहणियाँ भी
थोड़ी पागल सी होती हैं।।

मायके से सासरे तक
हर जिम्मेदारी निभाती है
कल की भोली गुड़िया रानी
आज समझदार हो जाती हैं
ये गृहणियाँ भी.....
वक्त़ के साथ ढल जाती हैं।।
😊😊 शुभ दोपहरी

Saturday, November 9, 2019

आओ कोई बात करते हैं

*आओ किसी का यूँही, इंतजार करते हैं..!*
*चाय बनाकर फिर, कोई बात करते हैं..!!*

*उम्र पचास के पार, हो गई हमारी..!*
*बुढ़ापे का, इस्तक़बाल करते है..!!*

*कौन आएगा अब, हमको देखने यहां..!*
*एक दूसरे की, देखभाल करते है..!!*

*बच्चे हमारी पहुंच से, अब दूर हो गए..!*
*आओ फिर से दोस्तो को, कॉल करते हैं..!!*

*जिंदगी जो बीत गई, सो बीत गई..!*
*बाकी बची में फिर से, प्यार करते हैं..!!*

*खुदा ने जो भी दिया, लाजवाब दिया..!*
*चलो शुक्रिया उसका, बार बार करते हैं..!!*

*सभी का हाल यही है, इस जमाने में..!*
*ग़ज़ल ये सबके, नाम करते हैं,*