Tuesday, April 10, 2018

तुम लगते हो

वो जो तुम चुप से लैपटॉप पर
चिपके पड़े रहते हो,एकदम फुस्स से दिखते हो,
फ्यूजड़,कनफ्यूजड़ और सिर झुकाए,
एकदम भी सही नहीं लगते,
सही लगते हो जब मेरी एक ही फोटो को निहार,
उसपर अपना ठेंगुआ दबा देते हो।

वेब पेज के पन्ने पलटते,
जब कभी चौंक के भौंहे चढ़ा लेते हो,
और कभी किसी वाहियात से चुटकुले को पढ़,
मंद-मंद मुसकाते हो,
तब भी तुम उतने अच्छे नहीं लगते,
पर जब अकेले में बैठ दो कप चाय की गुहार
लगाते हो, सच में तब तुम, तुम लगते हो।

कभी ऐनी,कभी टेनी,कभी रिंकी,कभी पिंकी
से जब तुम घंटों फोन पर हूं-हां बतियाते हो,
या कभी कमरे में बंद कर खुद को,
किसी गहन मुद्दे पर सिर खपाते हो,
अच्छे नहीं लगते सच्ची, मैं सिर पीटकर रह जाती हूं,
पर जब फोन के चार्जर के बहाने मुझको पास बुलाते हो,
तब लगते हो,कुछ खाली-से,और मेरी खुशबू से ही भर जाते हो।

तुम्हारे इस खाली उपवन में,कुछ घासें जो उग आई हैं,
बिना फूल के देखो तो, ये कितनी मुरझाई हैं,
कोई भंवरा नहीं इनमें, न ही मधुमक्खी इठलाती है,
छी, कैसा मधुमास यहां, मुझको ये न भाती हैं,
पर पास बैठ जब ये उपवन खुद लहर-लहर लहराते हैं,
फिर क्या लैपटॉप, चाय के कुल्हड़, पास फटक नहीं पाते हैं,
तब लगता है तुम यहीं कहीं हो पास मेरे,
इस कंधे में हो सिर मेरा, और दूर रहें ये काम मेरे।

Saturday, April 7, 2018

बाली का हनुमानजी को ललकारना

जय श्री राम, जय श्री राम,,

कथा का आरंभ तब का है ,,

जब बाली को ब्रम्हा जी से ये वरदान प्राप्त हुआ,,
की जो भी उससे युद्ध करने उसके सामने आएगा,,
उसकी आधी ताक़त बाली के शरीर मे चली जायेगी,,

और इससे बाली हर युद्ध मे अजेय रहेगा,,

सुग्रीव, बाली दोनों ब्रम्हा के औरस ( वरदान द्वारा प्राप्त ) पुत्र हैं,,

और ब्रम्हा जी की कृपा बाली पर सदैव बनी रहती है,,

बाली को अपने बल पर बड़ा घमंड था,,
उसका घमंड तब ओर भी बढ़ गया,,
जब उसने करीब करीब तीनों लोकों पर विजय पाए हुए रावण से युद्ध किया और रावण को अपनी पूँछ से बांध कर छह महीने तक पूरी दुनिया घूमी,,

रावण जैसे योद्धा को इस प्रकार हरा कर बाली के घमंड का कोई सीमा न रहा,,

अब वो अपने आपको संसार का सबसे बड़ा योद्धा समझने लगा था,,

और यही उसकी सबसे बड़ी भूल हुई,,

अपने ताकत के मद में चूर एक दिन एक जंगल मे पेड़ पौधों को तिनके के समान उखाड़ फेंक रहा था,,

हरे भरे वृक्षों को तहस नहस कर दे रहा था,,

अमृत समान जल के सरोवरों को मिट्टी से मिला कर कीचड़ कर दे रहा था,,

एक तरह से अपने ताक़त के नशे में बाली पूरे जंगल को उजाड़ कर रख देना चाहता था,,

और बार बार अपने से युद्ध करने की चेतावनी दे रहा था- है कोई जो बाली से युद्ध करने की हिम्मत रखता हो,,
है कोई जो अपने माँ का दूध पिया हो,,
जो बाली से युद्ध करके बाली को हरा दे,,

इस तरह की गर्जना करते हुए बाली उस जंगल को तहस नहस कर रहा था,,

संयोग वश उसी जंगल के बीच मे हनुमान जी,, राम नाम का जाप करते हुए तपस्या में बैठे थे,,

बाली की इस हरकत से हनुमान जी को राम नाम का जप करने में विघ्न लगा,,

और हनुमान जी बाली के सामने जाकर बोले- हे वीरों के वीर,, हे ब्रम्ह अंश,, हे राजकुमार बाली,,
( तब बाली किष्किंधा के युवराज थे) क्यों इस शांत जंगल को अपने बल की बलि दे रहे हो,,

हरे भरे पेड़ों को उखाड़ फेंक रहे हो,
फलों से लदे वृक्षों को मसल दे रहे हो,,
अमृत समान सरोवरों को दूषित मलिन मिट्टी से मिला कर उन्हें नष्ट कर रहे हो,,
इससे तुम्हे क्या मिलेगा,,

तुम्हारे औरस पिता ब्रम्हा के वरदान स्वरूप कोई तुहे युद्ध मे नही हरा सकता,,

क्योंकि जो कोई तुमसे युद्ध करने आएगा,,
उसकी आधी शक्ति तुममे समाहित हो जाएगी,,

इसलिए हे कपि राजकुमार अपने बल के घमंड को शांत कर,,

और राम नाम का जाप कर,,
इससे तेरे मन में अपने बल का भान नही होगा,,
और राम नाम का जाप करने से ये लोक और परलोक दोनों ही सुधर जाएंगे,,

इतना सुनते ही बाली अपने बल के मद चूर हनुमान जी से बोला- ए तुच्छ वानर,, तू हमें शिक्षा दे रहा है, राजकुमार बाली को,,
जिसने विश्व के सभी योद्धाओं को धूल चटाई है,,

और जिसके एक हुंकार से बड़े से बड़ा पर्वत भी खंड खंड हो जाता है,,

जा तुच्छ वानर, जा और तू ही भक्ति कर अपने राम वाम के,,

और जिस राम की तू बात कर रहा है,
वो है कौन,

और केवल तू ही जानता है राम के बारे में,

मैंने आजतक किसी के मुँह से ये नाम नही सुना,

और तू मुझे राम नाम जपने की शिक्षा दे रहा है,,

हनुमान जी ने कहा- प्रभु श्री राम, तीनो लोकों के स्वामी है,,
उनकी महिमा अपरंपार है,
ये वो सागर है जिसकी एक बूंद भी जिसे मिले वो भवसागर को पार कर जाए,,

बाली- इतना ही महान है राम तो बुला ज़रा,,
मैं भी तो देखूं कितना बल है उसकी भुजाओं में,,

बाली को भगवान राम के विरुद्ध ऐसे कटु वचन हनुमान जो को क्रोध दिलाने के लिए पर्याप्त थे,,

हनुमान- ए बल के मद में चूर बाली,,
तू क्या प्रभु राम को युद्ध मे हराएगा,,
पहले उनके इस तुच्छ सेवक को युद्ध में हरा कर दिखा,,

बाली-  तब ठीक है कल     के कल नगर के बीचों बीच तेरा और मेरा युद्ध होगा,,

हनुमान जी ने बाली की बात मान ली,,

बाली ने नगर में जाकर घोषणा करवा दिया कि कल नगर के बीच हनुमान और बाली का युद्ध होगा,,

अगले दिन तय समय पर जब हनुमान जी बाली से युद्ध करने अपने घर से निकलने वाले थे,,
तभी उनके सामने ब्रम्हा जी प्रकट हुए,,

हनुमान जी ने ब्रम्हा जी को प्रणाम किया और बोले- हे जगत पिता आज मुझ जैसे एक वानर के घर आपका पधारने का कारण अवश्य ही कुछ विशेष होगा,,

ब्रम्हा जी बोले- हे अंजनीसुत, हे शिवांश, हे पवनपुत्र, हे राम भक्त हनुमान,,
मेरे पुत्र बाली को उसकी उद्दंडता के लिए क्षमा कर दो,,

और युद्ध के लिए न जाओ,

हनुमान जी ने कहा- हे प्रभु,,
बाली ने मेरे बारे में कहा होता तो मैं उसे क्षमा कर देता,,
परन्तु उसने मेरे आराध्य श्री राम के बारे में कहा है जिसे मैं सहन नही कर सकता,,
और मुझे युद्ध के लिए चुनौती दिया है,,
जिसे मुझे स्वीकार करना ही होगा,,
अन्यथा सारी विश्व मे ये बात कही जाएगी कि हनुमान कायर है जो ललकारने पर युद्ध करने इसलिए नही जाता है क्योंकि एक बलवान योद्धा उसे ललकार रहा है,,

तब कुछ सोंच कर ब्रम्हा जी ने कहा- ठीक है हनुमान जी,,
पर आप अपने साथ अपनी समस्त सक्तियों को साथ न लेकर जाएं,,
केवल दसवां भाग का बल लेकर जाएं,,
बाकी बल को योग द्वारा अपने आराध्य के चरणों में रख दे,,
युद्ध से आने के उपरांत फिर से उन्हें ग्रहण कर लें,,

हनुमान जी ने ब्रम्हा जी का मान रखते हुए वैसे ही किया और बाली से युद्ध करने घर से निकले,,

उधर बाली नगर के बीच मे एक जगह को अखाड़े में बदल दिया था,,

और हनुमान जी से युद्ध करने को व्याकुल होकर बार बार हनुमान जी को ललकार रहा था,,

पूरा नगर इस अदभुत और दो महायोद्धाओं के युद्ध को देखने के लिए जमा था,,

हनुमान जी जैसे ही युद्ध स्थल पर पहुँचे,,
बाली ने हनुमान को अखाड़े में आने के लिए ललकारा,,

ललकार सुन कर जैसे ही हनुमान जी ने एक पावँ अखाड़े में रखा,,

उनकी आधी शक्ति बाली में चली गई,,

बाली में जैसे ही हनुमान जी की आधी शक्ति समाई,,

बाली के शरीर मे बदलाव आने लगे,
उसके शरीर मे ताकत का सैलाब आ गया,
बाली का शरीर बल के प्रभाव में फूलने लगा,,
उसके शरीर फट कर खून निकलने लगा,,

बाली को कुछ समझ नही आ रहा था,,

तभी ब्रम्हा जी बाली के पास प्रकट हुए और बाली को कहा- पुत्र जितना जल्दी हो सके यहां से दूर अति दूर चले जाओ,

बाली को इस समय कुछ समझ नही आ रहा रहा,,
वो सिर्फ ब्रम्हा जी की बात को सुना और सरपट दौड़ लगा दिया,,

सौ मील से ज्यादा दौड़ने के बाद बाली थक कर गिर गया,,

कुछ देर बाद जब होश आया तो अपने सामने ब्रम्हा जी को देख कर बोला- ये सब क्या है,

हनुमान से युद्ध करने से पहले मेरा शरीर का फटने की हद तक फूलना,,
फिर आपका वहां अचानक आना और ये कहना कि वहां से जितना दूर हो सके चले जाओ,

मुझे कुछ समझ नही आया,,

ब्रम्हा जी बोले-, पुत्र जब तुम्हारे सामने हनुमान जी आये, तो उनका आधा बल तममे समा गया, तब तुम्हे कैसा लगा,,

बाली- मुझे ऐसा लग जैसे मेरे शरीर में शक्ति की सागर लहरें ले रही है,,
ऐसे लगा जैसे इस समस्त संसार मे मेरे तेज़ का सामना कोई नही कर सकता,,
पर साथ ही साथ ऐसा लग रहा था जैसे मेरा शरीर अभी फट पड़ेगा,,,

ब्रम्हा जो बोले- हे बाली,

मैंने हनुमान जी को उनके बल का केवल दसवां भाग ही लेकर तुमसे युद्ध करने को कहा,,
पर तुम तो उनके दसवें भाग के आधे बल को भी नही संभाल सके,,

सोचो, यदि हनुमान जी अपने समस्त बल के साथ तुमसे युद्ध करने आते तो उनके आधे बल से तुम उसी समय फट जाते जब वो तुमसे युद्ध करने को घर से निकलते,,

इतना सुन कर बाली पसीना पसीना हो गया,,

और कुछ देर सोच कर बोला- प्रभु, यदि हनुमान जी के पास इतनी शक्तियां है तो वो इसका उपयोग कहाँ करेंगे,,

ब्रम्हा- हनुमान जी कभी भी अपने पूरे बल का प्रयोग नही कर पाएंगे,,
क्योंकि ये पूरी सृष्टि भी उनके बल के दसवें भाग को नही सह सकती,,

ये सुन कर बाली ने वही हनुमान जी को दंडवत प्रणाम किया और बोला,, जो हनुमान जी जिनके पास अथाह बल होते हुए भी शांत और रामभजन गाते रहते है और एक मैं हूँ जो उनके एक बाल के बराबर भी नही हूँ और उनको ललकार रहा था,,
मुझे क्षमा करें,,

और आत्मग्लानि से भर कर बाली ने राम भगवान का तप किया और अपने मोक्ष का मार्ग उन्ही से प्राप्त किया,,

तो बोलो,
पवनपुत्र हनुमान की जय,
जय श्री राम जय श्री राम,,

🌹🌹🙏🙏🙏🌹🌹

कृपया ये कथा जन जन तक पहुचाएं,
और पुण्य के भागी बने,,
जय श्री राम जय हनुमान,

Tuesday, April 3, 2018

अद्भुत स्वप्न

स्वर्ग की करेंसी..
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कल रात मैंने एक "सपना"  देखा.! मेरी Death हो गई....

जीवन में कुछ अच्छे कर्म किये होंगे इसलिये यमराज मुझे स्वर्ग में ले गये...

देवराज इंद्र ने मुस्कुराकर मेरा स्वागत किया...

मेरे हाथ में  एक बैग देखकर वे पूछने लगे ...

''इसमें क्या है..?"

मैंने कहा...'' इसमें मेरे जीवन भर की कमाई है, पन्द्रह लाख रूपये हैं ।"

इन्द्र ने 'BRP-16011966' नम्बर के एक लौकर की ओर इशारा करते हुए कहा-
''आप अपनी अमानत इसमें रख दीजिये..!''

मैं लौकर में अपनी बैग रख दी...

मुझे एक कमरा भी दिया...

मैं फ्रेश होकर  टहलने के लिये बाहर निकला...

देवलोक के एक शॉपिंग मॉल में अदभूत वस्तुएं देखकर
मेरा मन ललचा गया..!

मैंने कुछ चीजें पसन्द करके वास्केट में डाली, और काउंटर पर जाकर उन्हें दो हजार की करारे नोटें देने लगा...

मॉल के मैनेजर ने नोटों को देखकर कहा,
''यह करेंसी यहाँ नहीं चलती..!''

यह सुनकर मैं हैरान रह गया..!

मैंने बास्केट का सारा सामान छोड़कर इंद्र के पास
जाकर मॉल में मेरे करेंसी नहीं लेने की शिकायत की।

इंद्र ने मुस्कुराते हुए कहा कि, ''आप एक व्यापारी के यहाँ काम करते थे फिर भी इतना भी नहीं जानते..?
कि आपकी करेंसी आपके बाजु के मुल्क
पाकिस्तान, श्रीलंका और बांगलादेश में भी नही चलती...

और आप मृत्यूलोक की करेंसी स्वर्गलोक में चलाने की
मूर्खता कर रहे हो..?''

यह सब सुनकर मुझे मानो साँप सूंघ गया..!

मैं जोर जोर से दहाड़े मारकर रोने लगा. और परमात्मा से
दरखास्त करने लगा,
''हे भगवान्.ये... क्या हो गया.?''
''मैंने कितनी मेहनत से  ये पैसा कमाया..!''
''दिन नही देखा, रात नही देखा,"'' पैसा कमाया...!''
''जीवन भर हाय पैसा हाय पैसा किया...!
ना चैन से सोया, ना चैन से खाया...
बस, जिंदगी भर पैसा कमाया.!''
''और यह सब व्यर्थ गया..?''

''हाय राम, अब क्या होगा..!''

इंद्र ने कहा,- ''रोने से कुछ हासिल होने वालानहीं है.!! "
"जिन जिन लोगो ने यहाँ जितना भी पैसा लाया, सब रद्दी हो गया।"
"जमशेद जी टाटा के 55 हजार करोड़ रूपये,
बिरला जी के 47 हजार करोड़ रूपये,
धीरू भाई अम्बानी के 29 हजार करोड़
अमेरिकन डॉलर...! सबका पैसा यहां पड़ा है...!"

मैंने इंद्र से पूछा- "फिर यहां पर कौनसी करेंसी चलती है..?"

इंद्र ने कहा- "धरती पर अगर  कुछ अच्छे कर्म किये है...!

जैसे किसी दुखियारे को मदद की, किसी रोते हुए को हसाया, किसी गरीब बच्ची कीवशादी कर दी,  किसी अनाथ बच्चे को पढ़ा लिखा कर काबिल बनाया...!
किसी को व्यसनमुक्त किया...! किसी अपंग स्कुल, वृद्धाश्रम या मंदिरों में दान धर्म किया...!"

"ऐसे पूण्य कर्म करने वालों को यहाँ पर एक क्रेडिट कार्ड मिलता है...! और उसी का उपयोग कर आप यहाँ
स्वर्गीय सुख का उपभोग ले सकते है..!''

मैंने कहा,"भगवन.... मुझे यह पता नहीं था.  इसलिए मैंने अपना जीवन व्यर्थ गँवा दिया.!!"

"हे प्रभु, मुझे थोडा आयुष्य दीजिये..!''

और मैं गिड़गिड़ाने लगा.!

इंद्र को मुझ पर दया आ गई.!!

इंद्र ने तथास्तु कहा और मेरी नींद खुल गयी..!

मैं जाग गया..!

अब मैं वो दौलत कमाऊँगा
जो वहाँ चलेगी..!!

रचना किसी और की है मैंने तो आप तक पहुंचाने में सिर्फ मेरी उंगलियों का इस्तेमाल किया है।

बदलते पहलू

आदमी जब पत्तल में खाना खाता था,
और घर मे जब कोई मेहमान आता था..
मेहमान को देख के वह हरा हो जाता था,
स्वागत में पूरा परिवार बिछ जाता था....

बाद में जब वह मिट्टी के बर्तन में खाने लगा,
रिश्तों को जमीन से जुड़कर निभाने लगा..

फिर जब पीतल के बर्तन उपयोग में लेता था,
रिश्तों को साल छः महीने में चमका लेता था..

फिर  परिवार स्टील के बर्तन में खाने लगा,
रिश्तों को भी लंबे समय तक निभाने लगा..

लेकिन बर्तन कांच के जब से बरतने लगे,
एक हल्की सी चोट में रिश्ते बिखरने लगे..

अब बर्तन थर्मोकोल पेपर के इस्तेमाल होने लगे,
सारे सम्बन्ध भी अब यूज़ एंड थ्रो होने लगे....

Monday, April 2, 2018

Today's truth

बेरोजगारी पर कटाक्ष..

पुल पर चलते आदमी को
आवाज लगाई- ‘बचाओ!’

पुल पर चलते आदमी ने
रस्सी नीचे गिराई
और कहा- ‘आओ!’

नीचे वाला आदमी
रस्सी पकड़ नहीं पा रहा था..
और रह-रह कर चिल्ला रहा था-
‘मैं मरना नहीं चाहता
बड़ी महंगी ये जिंदगी है
कल ही तो फंला कंपनी में
मेरी नौकरी लगी है।’

इतना सुनते ही
पुल वाले आदमी ने
रस्सी ऊपर खींच ली
और उसे मरता देख
अपनी आंखें मींच ली..

दौड़ता-दौड़ता वह
फंला कंपनी पहुंचा
और हांफते-हांफते बोला-
‘अभी-अभी आपका एक आदमी
डूब के मर गया है
इस तरह वो
आपकी कंपनी में
एक जगह खाली कर गया है..

ये मेरी डिग्रियां संभालें
बेरोजगार हूं
उसकी जगह मुझे लगा लें।’

ऑफिसर ने हंसते हुए कहा-
‘भाई, तुमने आने में
तनिक देर कर दी
ये जगह तो हमने
अभी दस मिनिट पहले ही
भर दी..

और इस जगह पर हमने
उस आदमी को लगाया है
जो उसे धक्का देकर
तुमसे दस मिनिट पहले
यहां आया है..‼
❗‼❗‼❗‼❗‼

Friday, March 30, 2018

True happiness

🌸🙏🌸
The Musk Deer Does Not Know That The Fragrance Of Musk Is Emanating From it's Own Navel. It Wanders About Here And There To Find Out The Source Of This Smell. Even So, The Deluded, Ignorant Man Is Not Aware That The Fountain Of Bliss Is Within Himself. He Is Running After External Perishable Objects To Get Happiness. Each Time You Search For Happiness Outside Of yourself, You Wander Away From It's Real Source. Turn Inward. The Highest Happiness Can Be Had Through Realization Of Self. Whereas Pleasure Depends On The Nervous System, Mind And Sense Objects, True Happiness Is Independent And Self Existent - It Is In Yourself.                                                                                  *Life's Little Instructions for the Day*
There is no unique picture of reality. "If you love something let it go. If it comes back to you it's yours. If it doesn't, it never was."
🙏
स्वस्थ रहें, मस्त रहें एवं संतुष्ट रहें...😊
🙏
*हाँ, 1 बात और, सदा मुस्कुराते रहें...😊*
🙏

Wednesday, March 14, 2018

तुम्हारी यही अदा तो दिल को भा गईं

पत्नी  मायके जाती है और मज़े लेने के लिये पति को मैसेज भेजती है:

"मेरी मोहब्ब्त को अपने दिल में ढूंढ लेना;
और हाँ, आटे को अच्छी तरह गूँथ लेना!

मिल जाए अगर प्यार तो खोना नहीं;
प्याज़ काटते वक्त बिलकुल रोना नहीं!

मुझसे रूठ जाने का बहाना अच्छा है;
थोड़ी देर और पकाओ आलू अभी कच्चा है!

मिलकर फिर खुशियों को बाँटना है;
टमाटर जरा बारीक़ ही काटना है!

लोग हमारी मोहब्ब्त से जल न जाएं;
चावल टाइम पे देख लेना कहीं गल न जाएं!

कैसी लगी हमारी ग़जल बता देना;
नमक कम लगे तो और मिला लेना!

     😜😜😜😜😜😜😜😜
         पति का सुपर रिप्लाई:

तुम्हारी यही अदा तो दिल को भा गईं..
तुम्हारे जाते ही,  पड़ोसन खाना पकाने आ गई ..
😊😊😊😊 😇😇😇😇🤗🤗

पत्नी 120 के स्पीड से घर वापस आ गयी।

😜😜😷😷😆😆😋